Tuesday, February 18, 2020
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अमेरिका दुनिया में शक्तिशाली कैसे बना? जानिए पूरी कहानी

अमेरिका के विश्व महाशक्ति बनने का एक कारण यह भी है कि अमेरिकन 50 साल आगे का सोचते है।

दुनिया में 200 से भी अधिक देश है, लेकिन सबसे विकसित देश की बात होती है तो अमेरिका का नाम पहले आता है। चाहे इकोनॉमिक्स हो, डिफेंस हो या विश्वव्यापी नेटवर्क। हर मामले में दुनिया का नंबर वन देश अमेरिका ही कहलाता है। पर क्या आप जानते है कि एक समय अमेरिका में गरीबी ही गरीबी थी। उसकी स्थिति एक ग़रीब देश की तरह थी। अगर आप नही जानते तो हम बताने जा रहे है कि एक ग़रीब अमेरिका कैसे दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बना?


एक्सीडेंटल खोज

भारत की खोज से अमेरिका की कहानी शुरू होती है। दरअसल इटली के नाबिक क्रिस्टोफर कोलंबस यूरोप से समुद्र के रास्ते भारत की खोज करने निकला, लेकिन जब भूमि पर पहुँचा तो वहाँ लाल चमरी वाले लोगों को देखा। चूंकि कोलंबस भारत खोज करने निकला था, इसलिए कोलंबस ने उन्हे रेड इंडियन नाम रख दिया। लेकिन 4 साल बाद वास्कोडिगामा भारत आया तो दुनिया को पता चला कि कोलंबस ने भारत को नही, बल्कि ग़लती से अमेरिका को खोज निकाला था।

अमेरिका की खोज के बाद दुनिया को इसके बारे में पता चला। ऐसे में यूरोपियन देश जैसे- स्पेन, फ्रांस, पुर्तगालन और ब्रिटेन ने अपनी दावेदारी के लिए वहाँ कलोनियां बसाना शुरू किया। धीरे-धीरे युरोपियंस का अमेरिका के ऊपर दब दबा बढ़ता चला गया। तब ब्रिटेन ने अमेरिका को पूरी तरह ग़ुलाम बना लिया। ऐसे में अमेरिकन की स्थिति काफी खराब होने लगी। ग़ुलाम अमेरिका की हालत ग़ुलाम भारत की तरह ही हो गया। लेकिन अमेरिका ने जल्द ही अंग्रेजों के चंगुल से खुद को आज़ाद कर लिया और 1788 में अपना संविधान लागू कर दिया।

एक्सीडेंटल उदय

आज़ाद अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन हुए। उनके समय अमेरिका आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ था। तब दुनिया में अमेरिका की कोई हैसियत नही थी। एक समय आया जब अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति बने। उनके समय में भी अमेरिका की स्थिति दयनीय ही थी। उस समय जनता में दास प्रथा को लेकर मतभेद चल रहा था, जिसे लेकर 1861 ई. में बड़ा संघर्ष हुआ। उसे अमेरिका का गृह युद्ध कहा गया। हालांकि अब्राहम लिंकन ने अमेरिका के लिए दूरदर्शी सोच रखकर कई कार्य किए, लेकिन अब भी अमेरिका विकसित नही हो पाया था।



20वी सदी में ब्रिटेन दुनिया की महाशक्ति बनी हुई थी, लेकिन प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। साथ ही यूरोप में जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों को भारी नुकसान हुआ। खासकर यूरोप में कई मिले और कारखाने बंद हो गए, जिससे यूरोप बुरी तरह से बर्बाद हो गया। इसका फायदा अमेरिका ने उठाया। यूरोप में जो भी कंपनियां बंद हुई थी, उसे अमेरिका ने अपने यहाँ स्थापित कर दिया और पूरे यूरोप और दुनियाभर में अमेरिका अपना माल बेंचना शुरू कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने इतना पैसा कमाया कि वह आर्थिक रूप में दुनिया में नंबर वन पर आ गया।   

डॉलर का योगदान

अमेरिका का विश्व महाशक्ति बनने में उसके डॉलर का भी अहम योगदान रहा। दरअसल अमेरिका ने अपने करेंसी को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए वैश्विक मुद्रा घोषित कर दिया। आज दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों में जो विदेशी मुद्रा भंडार होता है, उसमें 64 प्रतिशत अमेरिकी डॉलर होते हैं। ऐसे में डॉलर का वैश्विक मुद्रा बनने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था ताक़त बनकर उभरी।

अमेरिका की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निकसन ने स्मार्ट कार्य किए। उन्होंने कच्चे तेल के लिए सऊदी अरबिया और खाड़ी देशों को डॉलर में ही बेचने के लिए मनवाया। इससे अमेरिका का डॉलर और भी शक्तिशाली हो गया। डॉलर की अहमियत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते है कि 65 प्रतिशत डॉलर का इस्तेमाल अमेरिका के बाहर दूसरे देशों में होता है। दुनियाभर में 39 प्रतिशत कर्ज डॉलर में ही दिए जाते हैं।

दूरदर्शी सोच

अमेरिका के आगे बढ़ने का एक कारण यह भी है अमेरिकन 50 साल आगे का सोचते है। इसका जिक्र फारेड जकारिया की किताब ‘फ्रॉम वेल्थ टू पावर’ में मिलता हैं। ये बात सच भी है कि अमेरिका ने अपने मकसद के लिए दुनिया के बुद्धिजीवियों को अपनी ओर आकर्षित किया। यही कारण है कि अमेरिका में टेक्नोलॉजी का इतना विकास हो सका हैं।   

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