Tuesday, September 29, 2020
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अमिताभ बच्चन को मिला दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, हिन्दी सिनेमा में उनके 50 साल पूरे

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया हैं, जो की बॉलिवुड का सबसे बड़ा सम्मान है। 5 दशकों से सिल्वर स्क्रीन पर बेहतरीन एक्टिंग से मनोरंजन करने वाले अमिताभ बच्चन 76 साल की उम्र में भी एक्टिव हैं। अमिताभ बच्चन ने इसी साल हिन्दी सिनेमा में 50 साल पूरे भी कर लिए हैं, लेकिन हिन्दी सिनेमा में अमिताभ बच्चन का शुरूवाती सफर बेहद मुश्किल भरा था। इसके बावजुद उन्होंने बॉलिवुड में अपना पहचान बनाया।



आठ सौ रूपये की तनख्वाह पर नौकरी करते थे अमिताभ  

अमिताभ बच्चन मुंबई आने से पहले कोलकत्ता में एक शिपिंग कम्पनी में नौकरी करते थें। इसके लिए उन्हे 800 रूपये प्रति माह वेतन मिलता था। एक दिन माँ ने अमिताभ को कुछ ऐसा कहा की प्रेरित होकर उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी और वर्ष 1968 में मुंबई चले गए। मुंबई आते वक्त अमिताभ के पास तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का लिखा खत था, जिसकी बदौलत उन्हें वर्ष 1969 में पहली बार लेखक और निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ में काम करने का मौका मिला। हालाँकि ये फिल्म असफल साबित हुई, जिसके कारण अमिताभ दर्शकों के बीच कुछ खास पहचान नहीं बना पाए।

फिल्म ‘आनंद’ से मिली अमिताभ को पहचान

फिल्म निर्माता- निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा वर्ष 1971 में अमिताभ बच्चन को राजेश खन्ना के साथ फिल्म आनंद में काम करने का मौका मिला। राजेश खन्ना तब सुपरस्टार थे, इसके बावजुद अमिताभ दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे। इस फिल्म के लिए अमिताभ को सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया था।

जब शूटिंग के दौरान फिल्म से बाहर किए गए

ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘गुड्डी’ में हिरो की भूमिका के लिए अमिताभ को ऑफर मिला। शुटींग शुरू हुई, कई सीन भी शूट कर लिए गए, लेकिन बाद में अमिताभ को यह कहकर फिल्म से निकाल दिया गया कि इस भूमिका के लिए वे फीट नही बैठ रहे। इसके बाद फिल्म के उस किरदार को निभाने के लिए समित बांजा साइन कर लिए गए। गुड्डी फिल्म से निकाले जाने के बाद भी अमिताभ ऋषिकेश मुखर्जी के साथ कई फिल्में किए। जैसे- चुपके- चुपके, अभिमान इत्यादि।


अमिताभ के कैरियर में टरनिंग प्वाईंट

अमिताभ बच्चन के कैरियर में टरनिंग प्वाईंट तब आया जब निमार्ता प्रकाश मेहरा की सुपर हीट फिल्म ‘जंजीर’ में अमिताभ को काम करने का मौका मिला। ये फिल्म इतनी सफलता हुई कि बतौर अभिनेता अमिताभ फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये। हालाँकि ये फिल्म अमिताभ को किस्मत से मिली थी। दरअसल वर्ष 1973 मे निमार्ता-निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी जंजीर फिल्म के लिए अभिनेता की तलाश कर रहे थे। वे इस फिल्म के लिए सबसे पहले देवानंद के पास गये और बाद में अभिनेता राजकुमार से काम करने की गुजारिश की, लेकिन किसी कारणवश दोनों अभिनेताओं ने जंजीर में काम करने से मना कर दिया। तब थक हारकर प्रकाश मेहरा ने इस फिल्म के लिए अमिताभ को साइन किया।

जब शूटिंग के दौरान जान जाते जाते बची

अमिताभ बच्चन के जीवन में वो मनहूस वक्त तब आया जब फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दरअसल इस फिल्म में खलनायक की भूमिका निभा रहे पुनीत इस्सर को अमिताभ के पेट पर पंच मारना था जो छूने के बजाय ज़ोर से लग गया। इस कारण अमिताभ के पेट की अंतड़ियां फट गईं। बेहद गंभीर हालत में उन्हे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस दौरान उनकी पत्नी जया बच्चन रोज़ ब्रीच कैंडी अस्पताल से सिद्धि विनायक मंदिर छह किमी तक पैदल जाकर उनकी जान की दुआ मांगी और उनके लाखों फैंस के द्वारा भगवान से किए गए प्रार्थनाएं अमिताभ को इस घटना से सही सलामत बाहर ले आया।

5 COMMENTS

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