Wednesday, August 5, 2020
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Bihar: जैसा बिहार दिखता है वैसा पहले नही था, इसका उतना ही पुराना इतिहास है जितना भारत का!

बिहार की जब बात होती है तो ज्यादातर लोगों का ध्यान गरीबी, बेरोजगारी या अशिक्षा पर केन्द्रित होता है। लेकिन इतिहास के स्वर्णिम पन्नों को पलटने पर पता चलता है कि जैसा बिहार दिखता है वैसा पहले नही था, बल्कि बिहार का इतिहास गौरवशाली रहा है। इसका इतिहास उतना ही पुराणा है जितना भारत का है। बिहार के मिट्टी में मौर्य, गुप्त आदि राजवंशो ने, मुगल शासकों ने राज किया। दुनिया को ज्ञान का पहला पाठ पढ़ाने वाला नालांदा विश्वविधालय बिहार में ही स्थित है। बौध धर्म और जैन धर्म की उत्पत्ति और इसके संस्थापक बिहार में हुए। सिखों के 10वें गुरू गोविंद सिह जी इसी मिट्टी में जन्में। रामायण काल में माँ सीता बिहार की धरती पर जन्म लेकर यहाँ की राजकुमारी बनी। भारत के सबसे गौरवशाली सम्राज्य मगद्ध और ढ़ाई हजार सालों तक मगध की राजधानी रही पाटलिपुत्र (पटना) वर्त्तमान समय में बिहार की राजधानी है।

बिहार का उल्लेख वेदों, पुराणों, महाकाव्यों आदि ग्रन्थों में मिलता है, जिससे पता चलता है कि भारत ही नही दुनिया का सबसे पहला गणराज्य बिहार के वैशाली में स्थापित किया गया था। आज से 26 सौ साल पहले बिहार को सबसे ज्यादा शांतिप्रिय यानी अहिंसा प्रिय भूमि कहा जाता था। बोधगया और पावापुरी में लोग शांति प्राप्त करने के लिए आते थें। यहाँ आना आज भी आना जारी है। भारत के चार महान राजा इसी बिहार से थें। सम्राट अशोक, राजा विक्रमादित्य, समुद्र गुप्त और चंद्रगुप्त मौर्य। प्रचीन काल में यहाँ की संस्कृति और सत्ता इतना समृद्ध था कि इसके बारे में अध्ययन करने के लिए दुनिया भर से लोग बिहार आया करते थें।

जनसंख्या

जनसंख्या की दृष्टीकोण से बिहार भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। 2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार की आबादी लगभग 10 करोड़ 38 लाख थी, जो साल 2020 में 12 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है। भारत के सभी राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा युवा बिहार में रहते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक यहाँ 2.8 करोड़ आबादी 15 से 30 वर्ष की आयु के हैं।


ग़रीबी और उसके मूल कारण


बिहार में अशिक्षा, ग़रीबी व बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। यहाँ लगभग 27 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे हैं। लगभग 17.5 प्रतिशत आबादी बेरोजगार हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 13 प्रतिशत है। बिहार की साक्षरता दर 63.82% हैं, जिसमे पुरुष साक्षरता दर 73.39% हैं, जबकि महिला साक्षरता दर 53.33 % हैं। ये सभी आंकड़ें बिहार के लोगों को ग़रीबी में जीने के लिए मजबूर करती हैं।

 
कई समस्याओं के बावजुद बिहार में बहुत पढ़े-लिखे, बुद्धिमान लोग भी हैं, फिर भी उनके पास नौकरी नहीं है। देश को सबसे ज्यादा आईएएस दोने वाला राज्य बिहार है, जिसकी काबीलियत से हर कोई वाक़िफ़ है और हर कोई जानता है कि इस राज्य में जितनी क्षमता है, उतनी दो राज्यों को मिलाने पर भी नहीं होगी। बस इन्हें अवसर की जरूरत है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

भारत का 40 प्रतिशत व्यापार सिर्फ बिहार में था

जैसा बिहार दिखता है वैसा पहले नही था। प्राचीन काल में बिहार देश की व्यापारिक राजधानी हुआ करती थी। तब भारत का 40 प्रतिशत व्यापार सिर्फ बिहार में (मगध, वैशाली, मिथिला, विदेहा, अंग, साक्य प्रदेश, विज्जी, जनका) में हुआ करता था।

बाढ़ और सुखें से कृषि बदहाल

बिहार कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ 80 प्रतिशत लोग कृषि से जुड़े हुए हैं। इसके बावजुद कृषि क्षेत्र में विकास नही हो पा रहा है। इसका मूख्य कारण प्राकृतिक आपदा है। ये एक ऐसी समस्या है, जो आजादी के 72 सालों के बाद भी बाढ़ तथा सूखा बिहार की नियति बने हुए हैं और प्रति वर्ष करोड़ों रुपये व्यय करने पर भी समस्या का हल नही हो पा रहा है। यही कारण है कि कृषि क्षेत्र में विकास रूकी हुई है। बिहार में कृषि की विकास दर 3.7 प्रतिशत है, जो रोजगार की दृष्टि से धीमी गति है।

बिहार औद्योगीकरण के मामले में पिछड़ापन का शिकार

औद्योगीकरण के मामले में बिहार पिछड़ापन का शिकार रहा है। 2000 में झारखंड के अलग होने के बाद बिहार में गिने-चुने उद्योग रह गये। 2013 के आंकड़ों के अनुसार, यहाँ मात्र 3,345 उद्योग हैं, जो काफी कम है। जीडीपी के मामले में बिहार 13वें नंबर पर है। इस वक्त बिहार की जीडीपी 84 बिलियन $ है।

उर्दू बिहार की दूसरी राज्य भाषा

बिहार की राज्यभाषा हिंदी है, जबकि उर्दू इस राज्य की दूसरी राज्य भाषा है। वर्तमान बिहार की बोलियों को ग्रियर्सन नामक विद्वान ने बिहारी भाषा में संबोधित किया है। बिहार में भाषा वर्ग की दृष्टि से सामान्यतः दो परिवारों की भाषाएं बोली जाती हैं- आर्य परिवार की भाषाएं और मुंडा परिवार की भाषाएं। आर्य परिवार की भाषाओं को बिहारी भाषा का नाम दिया गया है, जिसके अंतर्गत तीन भाषा सबसे प्रमुख है- मगही, भोजपुरी और मैथिली।

बिहार का ऐतिहासिक धरोहर

बिहार पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का केन्द्र रहा है। इस राज्‍य के प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं- राजगीरनालंदावैशालीपावापुरी जहाँ भगवान महावीर ने अंतिम सांस ली और निर्वाण को प्राप्‍त हुए। इसके अलावा विक्रमशिला उच्‍च शिक्षा के बौद्ध विश्‍वविद्यालय के अवशेषपटना पाटलीपुत्र का प्राचीन नगर और सासाराम शेरशाह सूरी का मक़बरा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।

बिहार का लाज़वाब व्यंजन

लिट्टी चोखा बिहारी व्यंजनों का एक ख़ास हिस्सा है। यह बिहार मे खाये जाने वाली पारम्परिक भोजन है। यहाँ आपको किसी भी रोस्टोरेंट में यह आसानी से मिल जाता है। इसके आलावा बिहार की मालपुआ काफी स्वादिष्ट होता है। यह उत्तर भारत में बनाये जाने वाली डिश है। बिहार की बाकी व्यंजनों की बात करे तो दालपूरी, खाजा, मखाना खीर, पेरूकिया, खजुरी, बैगन का भरता आदि शामिल है। 

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