Air India की बिक्री अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही में होगी! क्या है बिकने का कारण?

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Air India की बिक्री अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही में होगी! क्या है बिकने का कारण?

एयर इंडिया (Air India) को बेचने की तैयारी पूरी हो गई है। सरकार को अनुमान है कि एयर इंडिया के सौदे को अगले वित्त वर्ष पूरा कर लिया जाएगा। दीपम के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। बता दे कि एयर इंडिया के सौदे से सरकार को तकरीबन 7 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। 

कांत पांडेय का कहना है, “सरकार ने विनिवेश की रणनीति में बदलाव किया है। अब सरकारी कंपनियों की छोटी हिस्सेदारियों के बजाय बड़े विनिवेश का निर्णय लिया है। जिसे 2020-21 की पहली छमाही में इन सौदों को पूरा कर लेना चाहते हैं।“

बता दे कि सरकार ने पिछले सप्ताह एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए एक सूचना जारी किया था। साथ ही एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट की भी सौदे की जाएगी। एयर इंडिया एक्सप्रेस को 100 प्रतिशत और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बेची जाएगी।



एयर इंडिया को क्यों बेच रही है सरकार?

आपको विश्वास नही होगा कि एयर इंडिया हजारों रूपये के कर्ज में डूबा हुआ है। एयर इंडिया पर लगभग 80 हजार करोड़ रूपये का कर्ज है। पिछले 10 सालों से एयर इंडिया घाटे में चल रही है। साल 2018 से 2019 में एयर इंडिया को लगभग 8 हजार 550 करोड़ रूपये का घाटा हुआ था और आगे भी भारी नुकसान होने का ख़तरा है। एयर इंडिया को बचाने के लिए सरकार पिछले पांच सालों में लगभग 30 हजार करोड़ से भी अधिक निवेश किया, मगर नाकामयाबी ही हाथ लगी और घाटा बढ़ता ही रहा।

एयर इंडिया को क्यो नही मिल रहे ख़रीदार?

एयर इंडिया को खरीदने के लिए कई शर्तें रखी गई है। हालांकि सरकार पहले के मुकाबले शर्तों में थोड़ी ढ़िल दी है। शुरूआत में सरकार एयर इंडिया को 76 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बेचने की घोषणा की थी, लेकिन इसमे कोई भी ख़रीदार दिलचस्पी नही दिखाई। इस बार सरकार 76 प्रतिशत के बजाए 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की बात कही है। इस बार शायद कोई ख़रीदार मिल जाए।


खरीदारों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि डूबे हुए एयर इंडिया को फिर से खड़ा करने में लगभग 25 हजार करोड़ रूपये लगाने होंगे। एयर इंडिया के कूल कर्ज में लगभग 23 हजार करोड़ चुकाने होंगे। इन सब के बावजूद एयर इंडिया के लिए नए पसेंजर लाना भी बहुत बड़ा जोखिम है।

टाटा ने शुरू की थी एयर इंडिया

एयर इंडिया को जेआरडी टाटा ने 1932 में शुरू की थी। तब इसका नाम टाटा एयरलाइन था, जिसे 1946 में नाम बदलकर एअर इंडिया किया गया था। एअर इंडिया को पहली बार खूद जेआरडी टाटा ने उड़ाया था। उन्होने पहली बार मुंबई से कराची की उड़ान भरी थी।

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