Friday, June 5, 2020
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Hyderabad History: अतीत और वर्तमान हैदराबाद की शान, इसका भारत में विलय आसान नही था,जानें सबकुछ

हैदराबाद को ‘मोतियों का शहर’ (The city of pearl) कहा जाता है। ऐसा इसलिए की यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा हीरा, पन्ना और असली मोती मिलता है। व्यापार की दृष्टि से यह दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र हैं।

भारत के सर्वाधिक विकसित शहरों में हैदराबाद का भी एक नाम आता है। इस शहर ने पिछले कुछ सालों में काफी विकास किया है। ख़ासकर आईटी सेक्टर में विकास होने से जॉब के अवसर प्राप्त हुए है। हैदराबाद को देश का नवजवान शहर कहा जाता है, क्योंकि हैदराबाद तेलंगाना राज्य की राजधानी है और इसका गठन 7 साल पहले यानि 2 जून, 2014 को हुआ था। यहाँ बहने वाली कृष्‍णा नदी पर बना नागार्जुन सागर बांध, दुनिया का सबसे बड़ा बांध है, जो पत्‍थर से बनाया गया है।



हैदराबाद का इतिहास भी बड़ा दिलचस्प है। जिस समय अंग्रेज भारत छोड़कर जा रहे थे, उस समय यहाँ 565 राजवाड़ें थें। इनमें से तीन राजवाड़ें को छोड़कर सभी भारत में विलय करने का फैसला किया। उन तीन राजवाड़ों में एक हैदराबाद भी था। बाकी के दो राजवाड़ें कश्मीर और जूनागढ़ थे। इस विषय में आगे विस्तार से बात करेंगे, लेकिन इतिहास के साथ- साथ आज के समय में तेलंगाना और तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद की स्थिती पर भी गौर करेंगे।

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अतीत और वर्तमान हैदराबाद की शान।

हैदराबाद का इतिहास

हैदराबाद को मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने सन् 1591 में गोलकुंडा से अपनी राजधानी हटाकर नई राजधानी मूसी नदी के दक्षिणी तट पर बनाई। तकरिबन 100 सालों तक कुतुब शाही राजवंश ने वहाँ राज किया, लेकिन सन् 1724 में मुगल वायसराय आसिफ जाह ने उसे हराकर अपने आधीन कर लिया और खुद को हैदराबाद का पहला निजाम घोषित किया. 18वीं सदी के अन्त में अंग्रेज़ों से ‘सहायक सन्धि’ करने के उपरान्त निज़ाम अंग्रेज़ों के नियन्त्रण में काम करने लगें।

निज़ाम का शहर’ हैदराबाद में निजाम और सेना में वरिष्ठ पदों पर मुस्लिम काबिज थे। हालांकि हैदराबाद में 85 फिसदी लोग हिन्दु थे। इसके बावजुद अल्पसंख्यक मुसलमान उच्च पदों पर काबिज थे। गुलाम भारत के दौरान हैदराबाद काफी समृद्ध था। उसके पास अपनी सेना, रेल नेटवर्क और डाक तार की भी व्यवस्था थी।

हैदराबाद का भारत में विलय आसान नही था

जब भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली तब यहाँ 565 राजवाड़े थें। इनमे तीन राजवाड़े ऐसे थे जो भारत में मिलने से साफ इंकार कर दिया था। जिसमें एक हैदराबाद था। हैदराबाद के निजाम ने अंग्रेजों से स्वतंत्र राजतंत्र के दर्जे कि मांग की, लेकिन अंग्रेजों ने निजाम के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद निजाम ने मोहम्मद अली जिन्ना से संपर्क करके समर्थन मांगा, लेकिन जिन्ना ने भारत की स्थिती को भापते हुए निजाम को मदद देने से इंकार कर दिया।


भारत के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने हैदराबाद के निजाम से भारत में मिलने का अनुरोध किया। लेकिन निजाम ने उनके इस अनुरोध को खारिज कर दिया और 15 अगस्त 1947 को हैदराबाद को एक स्वतंत्र राष्ट्र होने का एलान कर दिया। इसके बाद भारत ने हैदराबाद पर सैन्य कार्रवाई की। भारतीय सेना की इस कार्रवाई को ऑपरेशन पोलो कहा गया। लगातार पांच दिनों तक चली कार्रवाई के बाद हैदराबाद की सेना ने हार मान ली और फिर 1948 में हैदराबाद का भारत में विलय हो गया।

मोतियों का शहर हैदराबाद

हैदराबाद को ‘मोतियों का शहर’ (The city of pearl) कहा जाता है। ऐसा इसलिए की यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा हीरा, पन्ना और असली मोती मिलता है। व्यापार की दृष्टि से यह दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र हैं।

मुख्य पर्यटन स्थल

हैदराबाद में पर्यटन स्थलों की कोई कमी नही है। यहाँ इतना अधिक पर्यटन स्थल है कि सबका दर्शन करने के लिए 1 महिना भी कम पड़ जाएं। हैदराबाद में वास्तुकला, इतिहास और कला प्रेमियों के लिए सबसे सुन्दर जगह हैं। यहाँ मक्का मस्जिद है, जो भारत की सबसे बड़ी मस्जिद मानी जाती है। कुछ अन्य सुंदर पुरानी मस्जिदों के साथ महलों, मीनारों और मकबरों की अद्भुत नक्कासी पर्यटकों को खूब भाता है। इन सब के अलावा हैदराबाद में कुछ खूबसूरत ऐतिहासिक मंदिर भी स्थित है। जैसे- बिरला मंदिर, चिल्कुर बालाजी मंदिर, श्री लक्ष्मीनरसिम्हा स्वामी मंदिर, श्री जगन्नाथ मंदिर, इत्यादि। ये सभी दर्शनीय स्थल ऐतिहासिक पहलुओं को प्रदर्शित करता हैं।

हैदराबाद तेलंगाना की राजधानी है। अगर तेलंगाना की बात करें तो-

  • तेलंगाना में आंध्रप्रदेश के 23 जिलों में से 10 जिले शामिल है।
  • तेलंगाना क्षेत्रफल के मामले में भारत का 12वां बड़ा राज्य हैं। जो 114, 840 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
  • इस राज्य के विधान सभा में 119 सीटे हैं जबकि विधान परिषद में 40 सीटें हैं।
  • तेलंगाना की कूल आबादी 3.52 करोड़ है। यहाँ का लिंगानुपात प्रति 1000 पुरूषों पर महिलाओं की संख्या 985 हैं।
  • तेलंगाना की जीडीपी भारत के सभी राज्यों में 8वें नंबर पर है। इसकी जीडीपी 8.43 लाख करोड़ है।
  • राज्य की साक्षरता दर 66.46 प्रतिशत है। इसमे पुरूष 74.95 प्रतिशत है, जबकि महिलाएं 57.92 प्रतिशत है।
  • तेलंगाना का मुख्य भाषा उर्दू और तेलुगू है।




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