Saturday, September 26, 2020
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झारखंड के आदिवासी ने कानून को मानने से किया इंकार, राष्ट्रपति को लौटाया आधार…

भारत के कानून को बहिष्कार करने वाले आदिवासियों का कहना है कि वे केवल आदिवासी कानून मानेंगे। सरकारी कानून, सरकारी व्यवस्था और सरकारी योजनाओं से उनका कोई मतलब नहीं हैं।

झारखंड के कुछ आदिवासियों ने भारतीय कानून को मानने से इंकार कर दिया हैं। इनमे 13 ऐसे परिवार है जिन्होंने अपने प्रमाण पत्र, वोटर आइडी कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, जॉब कार्ड, गैस कार्ड और पैन कार्ड राष्ट्रपति को लौटा दिए हैं। भारत के कानून को बहिष्कार करने वाले आदिवासियों का कहना है कि वे केवल आदिवासी कानून मानेंगे। सरकारी कानून, सरकारी व्यवस्था और सरकारी योजनाओं से उनका कोई मतलब नहीं हैं।



क्या है इन आदिवासियों का कहना?

सपरिवार को सरकारी सिस्टम पर भरोसा नहीं है। यही कारण है कि इन परिवारों के सभी सदस्यों ने राष्ट्रपति को सरकारी डॉक्युमेंट के साथ एक पत्र भी भेजा है। पत्र में सरकारी व्यवस्था और योजनाओं का बहिष्कार करने की बात कही गई है। पत्र में लिखा है कि ‘हम आदिवासी भारत हैं न की भारतीय, इसलिए हम आदिवासी कुदरती एवं प्राकृतिक रूलिंग से संचालित होते हैं। ये केंद्र सरकार और राज्य सरकार भारतीय अदालत के व्यवस्था से संचालित होते हैं। इस कारण अदालती व्यवस्था के कानून एवं सरकारी डॉक्युमेंट को हम सभी परिवार अखिल आदिवासी लौटा रहे हैं।‘ वही इस पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से सभी फाइलों को झारखंड मंत्रालय भेजी गई है।

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क्या है आदिवासियों का पत्थलगड़ी आंदोलन? 

बताया जाता है कि झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में पत्थलगड़ी की आड़ में माओवादी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। हालांकि स्थानीय पत्थलगड़ी समर्थकों का कहना है कि यह लड़ाई अपने हक के लिए लड़ी जा रही है, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि इस लड़ाई की आड़ में माओवादी उस क्षेत्र में अशांति फैला रहे हैं। इस बीच झारखंड में समानांतर सरकार चलाने की साज़िश में हेमंत सरकार सभी कांडों को वापस लेने के लिए भरपूर कोशिश कर रही है। वही कई गांवों में आदिवासी पत्थलगड़ी कर ‘अपना शासन, अपनी हुक़ूमत चलाने की बात कह रहे हैं।

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