Tuesday, September 29, 2020
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लाला लाजपत राय की जीवनी, क्रांतिकारी कार्य व उनके संदेश

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लाला लाजपत राय ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। इस कारण अंग्रेज पुलिस ने लाठियों से मारकर उनकी हत्या कर दी थी, जिसका बदला चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने अंग्रेज पुलिस अधिकारी को गोली मारकर ली थी। अंग्रेज पुलिस अधिकारी को मारने के कारण ही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई गई थी।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में लाला लाजपत राय ने एक नायक की भूमिका निभाई थी। चाहे अंग्रेजों के साइमन कमीशन के खिलाफ उनकी अगुवाई में चलाया गया आंदोलन हो या अंग्रेजों द्वारा किसान पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ अंग्रेज सरकार को सबक सिखाना हो। लालाजी ने हमेशा अपने लोगों के हक के लिए अग्रेज सरकार के सिने पर वार किया। यही कारण है कि अंग्रेज सरकार लालजी को कई बार जेल में रखकर उनके साहस को कुचलने की कोशिश की। लेकिन भारत माँ का ये सपूत कहाँ झुकने वाला था। उन्होंने लालजी को जितना सताया वे उतना ही मज़बूती से अंतिम सांस तक लड़े। भले ही अंग्रेज पुलिस ने लाठियों से मारकर लालाजी की हत्या कर दी, लेकिन उनके किए गए कार्य एवं उनके संदेश हमे आज भी प्रेरित करता रहता है। आगे जानिए लाला लाजपत राय के जीवन से जुड़े सभी तथ्य।


जीवन परिचय

लालजी की कहानी 28 जनवरी 1865 से शुरू होती है, जब उनका जन्म राधाकृष्ण और गुलाब देवी के घर हुआ। वे बचपन से ही कुसाग्र बुद्धि के थे। उन्होंने स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद 1880 में कानून की पढ़ाई के लिए लाहौर के सरकारी कॉलेज में एडमीशन लिया। कॉलेज के दौरान ही अंग्रेजों की कानून व्यवस्था को लेकर उनके मन में क्रोध उत्पन्न हुआ। इसी दौरान वे हंसराज और पंडित गुरुदत्त जैसे भावी स्वतंत्रता सेनानियों के संपर्क में आएं। कुछ ही समय में तीनों अच्छे दोस्त बन गए और स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज में शामिल हो गए।

लाला लाजपत राय की जीवनी, क्रांतिकारी कार्य व उनके संदेश

समाजिक कार्यों में लालाजी का योगदान

  1. आर्य समाज से जुड़ने के बाद लालाजी ने अनाथ बच्चे, विधवा और अकाल पीड़ित लोगों की मदद की। साथ ही भारतीय हिंदू समाज में फैली कूरीतियों और धार्मिक अंधविश्वासों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया।
  2. देश में व्याप्त छुआछूत के खिलाफ उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी। हिंदू अनाथ बच्चों के सहयोग के लिए भी उन्होंने आंदोलन किया, ताकि अंग्रेज अनाथ बच्चों को अपने साथ न ले जा सकें।
  3. शिक्षा के क्षेत्र में भी लालाजी ने काफी कार्य किए। उन दिनों भारत में पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था थी, जिसके तहत संस्कृत व उर्दू पढ़ाई जाती थी। आर्य समाज यूरोपीय शैली या अंग्रेजी व्यवस्था पर आधारित शिक्षा भारत में लाना चाहता था। ऐसे में लालाजी ने आर्य समाज के इस कदम को सराहा और इसका प्रचार प्रसार किया। इसके बाद ही पंजाब में डीएवी स्कूल की स्थापना संभव हो पाई।
  4. वर्ष 1907 में पंजाब में उन्होंने किसानों के खेती से संबंधित भी आन्दोलन किए। इसके बाद 1926 में वे जिनेवा में राष्ट्र के श्रम प्रतिनिधि बनकर गए। इस आंदोलन से किसानों को काफी मदद मिला।
  5. देश में हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए लालाजी ने प्रचार-प्रसार में काफी सहयोग दिया। देशभर में हिन्दी लागू करने के लिए उन्होंने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था।
  6. लाला लाजपत राय एक बैंकर भी थे। उन्होंने ही ग़ुलाम भारत में पहला स्वदेशी बैंक खोला था। उस बैंक का नाम पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) रखा था, जो आज भी लोगों को अपनी सेवा दे रही हैं।

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देश की आजादी में लालाजी का योगदान

      1. लाललाजी 1905 और 1908 में कांग्रेस की प्रतिनिधि बनकर इंग्लैंड गए, जहाँ भारतीय युवाओं को राष्ट्रवाद से जुड़ने का आहवान किया। उसके बाद वे जापान और अमेरिका का दौरा किया, जहाँ भारत की आज़ादी को लेकर अपना पक्ष रखा।
      2. अंग्रेज शासन में भारत को एक डोमिनियन का दर्जा हासिल करने के लिए होम रूल आन्दोलन किया गया। इस आंदोलन को सफल बनाने में लालाजी ने बहुत बड़ा योगदान दिया। 15 अक्टूबर, 1916 को उन्होंने अमेरिका में ‘होम रूल लीग’ की स्थापना की।
      3. भारत लौटने के बाद 1920 में लालजी ने जालियांवाला बाग हत्याकांड के खिलाफ पंजाब में अंग्रेज सरकार के विरोध में आंदोलन किया। इसके बाद महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन का भी उन्होंने पंजाब में नेतृत्व किया। यह आंदोलन सैद्धांतिक तौर पर रौलेट एक्ट के विरोध में किया गया था।
      4. भारत को संवैधानिक अधिकार दिए जाने को लेकर अंग्रेज सरकार की तरफ से साइमन कमीशन का गठन किया गया, लेकिन इस कमीशन में एक भी भारतीय को शामिल नही किया गया। इसके विरोध में लालाजी ने 30 अक्टूबर 1928 को लाहौर में उग्र आंदोलन किया।

      लालाजी की मृत्यु

      साइमन कमीशन आंदोलन के दौरान अंग्रेज पुलिस द्वारा लाठी-चार्ज में वे बुरी तरह से जख्मी हो गये। तब उन्होंने कहा था- ‘मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।बुरी तरह से जख़्मी होने के कारण 17 नवंबर 1928 को उनका देहांत हो गया।

      अंग्रेज पुलिस अधिकारी से बदला

      लालाजी के देहांत के बाद चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव ने बदला लेने का निर्णय लिया। इन क्रांतिकारियों ने 1 महिने के भीतर ही 17 दिसम्बर 1928 को अंग्रेज पुलिस अधिकारी सांडर्स को गोली मार दी। सांडर्स की हत्या के कारण ही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई गई थी।


      लालाजी की कही गई अमूल्य बातें

      • मनुष्य अपने गुणों से आगे बढ़ता है न कि दूसरों कि कृपा से।
      • मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी अंगेजी राज के कफ़न में कील साबित होगी।
      • जो सरकार अपनी निर्दोष जनता पर हमला करती है वह सभ्य सरकार होने का दावा नहीं कर सकती। ऐसे में ऐसी सरकार ज्यादा समय तक राज नहीं कर सकती।
      • साइमन कमीशन वापस जाओ।
      • अगर मैं भारतीय पत्रिकाओं को प्रभावित कर पाता तो मैं पहले पेज पर ‘शिशुओं के लिए दूध, वयस्कों के लिए भोजन और सभी के लिए शिक्षा’ शीर्षक छापता।

      लाला लाजपत राय द्वारा लिखी गयी पुस्तकें

      • भगवद् गीता का संदेश
      • प्राचीन भारत का इतिहास
      • भगवद् गीता का संदेश
      • मेरी निर्वासन कथा
      • संयुक्त राज्य अमेरिका पर एक हिन्दू के विचार

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