नितीश कुमार की जीवनी, शिक्षा, नौकरी, नीजी जीवन, राजनीति सफर व मुख्यमंत्री…

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नितीश कुमार की जीवनी, शिक्षा, नौकरी, नीजी जीवन, राजनीति सफर व मुख्यमंत्री...

नितीश कुमार (Nitish Kumar) बिहार के मुख्यमंत्री है, जिनका नाम देश के दिग्गज नेताओं में लिया जाता है। हमारे देश के रेल मंत्री के रूप में उन्होंने कई अहम कार्य किए। साल 2000 में नितीश पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री चुन लिए गए। तब से उन्होंने बिहार में विकास के लिए ढेरों काम किए। नितीश राजनीति में आने से पहले बिहार राज्य के बिजली बोर्ड में नौकरी करते थे, लेकिन जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से प्रेरित होकर नितीश राजनीति में कूद पड़े।

नितीश कुमार की जीवनी Nitish Kumar Biography In Hindi




जन्म

आज़ादी के चार साल बाद नितीश कुमार का जन्म हुआ था। 1 मार्च 1951 को बिहार के नालंदा जिले में स्थित बख्तियारपुर में उनका जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम कबीर राम लखन सिंह और माता का नाम परमेश्वरी देवी था। नितीश के पिता भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे। साथ ही वे आयुर्वेद के बड़े जानकार थे। राम लखन सिंह उस समय के गांधीवादी और आधुनिक बिहार के जनक कहे जाने वाले अनुग्रह नारायण सिंह के काफी करीब थे। नितीश पर अपने पिता का गांधीवादी सोच का बड़ा असर पड़ा। शायद यही कारण है कि वे आगे चलकर राजनेता बने।

शिक्षा

नितीश कुमार बचपन से पढ़ाई में काफी तेज थे। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई बख्तियारपुर के श्री गणेश हाई स्कूल से की। उसके बाद वे पटना चले गए, जहाँ बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (NIT Patna) में एडमिशन कराया। इस कॉलेज से 1972 में उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई कंप्लीट होने के बाद नितीश को  बिहार राज्य बिजली बोर्ड में नौकरी मिल गई। तब नितीश कुमार ने कभी नही सोचा था कि वह एक दिन बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे।

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निजी जीवन

नितीश कुमार का दिल जिस टीचर पर आया था, उसका नाम मंजू कुमारी सिंहा था। मंजू कुमारी पटना में एक स्कूल टीचर थीं। दोनों के प्यार का परवान इस कदर चढ़ा कि 22 फरवरी 1973 में कोर्ट मैरिज कर ली। नितीश कुमार ओबीसी समुदाय से आते है। वही उनकी पत्नी जेनरल वर्ग से आती थी। नितीश की पत्नी का 2007 में निधन हो गया था।

कहा जाता है कि अंतिम समय में नितीश का उनकी पत्नी के साथ अच्छे संबंध नही रहे। वह कभी सीएम आवास पर कदम तक नही रखी। हालांकि खबर ये भी आई थी कि पत्नि के निधन पर नीतीश कुमार काफी रोय थे। खैर, नीतिश कुमार का एक बेटा है, जिनका नाम निशांत कुमार है। निशांत बीआईटी से ग्रेजुएट है। 


राजनीतिक सफर की शुरूआत

नितीश कुमार बिजली बोर्ड में नौकरी करने के दौरान, साल 1974 में जयप्रकाश नारायण आंदोलन (JP movement) में शामिल हुए। इस आंदोलन के चलते उन्हे लगभग 1 साल तक जेल की सजा काटनी पड़ी। ऐसे समय में नितीश कुमार ने राजनीति में आने का फैसला किया। साल 1980 में वे पहली बार बिहार विधानसभा का चुनाव लड़े, लेकिन उन्हे हार का मुंह देखना पड़ा। दूसरी बार फिर लड़े और जीतकर साल 1985 में पहली बार बिहार विधानसभा पहुंचे।

बिहार विधानसभा पहुंचने के बाद नितीश कुमार साल 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने। इसी दौरान वे विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा केंद्र सरकार के विरूद्ध चलाए गए आंदोलन में शामिल हुए। साल 1989 में नितीश कुमार जनता दल यू के महासचिव बने।

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लोकसभा में नितीश कुमार का सफर

नितीश कुमार साल 1989 में लोकसभा का चुनाव लड़े। चुनाव में नितीश की जीत हुई और पहली बार वीपी सिंह की सरकार में कृषि एवं सहकारी विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री बने।

साल 1991 में नितीश कुमार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसी दौरान कांग्रेस को टक्कर देने के लिए जनता दल पार्टी का गठन हुआ। नितीश कुमार पार्टी के महासचिव और फिर संसद में उप-नेता बने।

पांच साल बाद 1996 के लोकसभा चुनाव में नितीश कुमार तीसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए। तकरीबन दो सालों तक वे रक्षा समिति के सदस्य बने रहे।

साल 1998 में नितीश कुमार 12वीं लोकसभा चुनाव जीते और चौथी बार लोकसभा के सदस्य बने। इस समय अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, जिसमे नितीश कुमार रेल मंत्री बने थे।

करीब एक साल बाद, 1999 में फिर से लोकसभा चुनाव हुए। नितीश पांचवी बार संसद पहुंचे और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं भूतल परिवहन का पद संभाला। कुछ समय इस पद पर रहने के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया और कृषि मंत्रालय के मंत्री बने। नितीश कुमार तकरीबन 1 साल तक हमारे देश के कृषि मंत्री रहे।

साल 2001 में नितीश कुमार रेल मंत्री बने। नितीश के कार्यकाल के दौरान ही साल 2002 में गुजरात दंगा हुआ था। नितीश 2001 से 2004 तक रेल मंत्री रहे और देश के लिए कई अहम फैसले लिए।

14वीं लोकसभा चुनाव में नितीश कुमार छठी बार लोकसभा के सदस्य बने।


मुख्यमंत्री के रूप में नितीश कुमार का सफर

नितीश के राजनीतिक करियर में सबसे मोड़ तब आया जब वे साल 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने। हालांकि 7 दिनों के भीतर ही उनकी सरकार गिर गई और उन्हे इस्तीफ़ा देना पड़ा।

उसके बाद, साल 2005 में बिहार विधानसभा का चुनाव हुआ। 15 साल से चल रही RJD सरकार को हराकर भाजपा के सपोर्ट से नितीश कुमार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।

पांच सालों में नितीश कुमार ने बिहार में इतना बढ़िया काम किया कि 2010 के विधानसभा चुनाव में उन्हे बंपर जीत मिली। नितीश कुमार तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। इस कार्यकाल के दौरान सपोर्ट पार्टी भाजपा से नितीश का अन बन हो गया।

साल 2014 में लोकसभा चुनाव हुए। मोदी लहर में नितीश की पार्टी जनता दल यू बिहार में बुरी तरह हार हुई। नितीश ने अपनी हार की जिम्मेदारी लेते हुए, नैतिकता के आधार पर सीएम पद से इस्तीफ़ा दे दिया। तब पार्टी की ओर से जितन राम मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया।

साल 2015 में नितीश कुमार चौथी बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह चुनाव नितीश के लिए मुश्किल भरा रहा। नितीश ने मोदी लहर में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस और आऱजेडी के साथ हाथ मिलाया। चुनाव में जनता ने नितीश के महा-गठबंधन को पसंद किया और भाजपा की हार हुई। नितीश कुमार मुख्यमंत्री और लालू के बेटे तेजस्वी उप-मुख्यमंत्री बने।

नितीश कुमार ने 26 जुलाई 2017 को एक बार फिर सीएम पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इसका कारण यह बताया गया कि उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, इसलिए नितीश कुमार तेजस्वी से उप-मुख्यमंत्री पद से हटने को कहा। लेकिन जब तेजस्वी ने ऐसा नही किया तो नितीश कुमार खुद ही सीएम से इस्तीफ़ा देकर महा-गठबंधन को तोड़ दिया।

इस्तीफ़े के कुछ घंटे बाद ही, नितीश कुमार फिर से भाजपा के साथ हो गए। विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर नितीश पांचवी बार मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल 2020 में खत्म होने जा रहा है। बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव होने वाले है, जिसमे देखना दिलचस्प होगा कि इस बार नितीश भाजपा के साथ चुनाव लड़ते है या किसी और के साथ।

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