महाराणा स्कूल के बंद तीन कमरों में मिली बेशकीमती व दुर्लभ किताबें,115 साल पुराणी

जिस कमरों को कबाड़ समझकर पिछले कई सालों से बंद किए गए थे। उस कमरे को खोलने पर जो दृश्य सामने आए वो चौकाने वाले थे।

0
378
News
महाराणा स्कूल के बंद तीन कमरों में मिली बेशकीमती व दुर्लभ किताबें,115 साल पुराणी

कभी कभी आप जिसे कचड़ा समझकर नजरअंदाज कर देते है और बाद में वहां से बेशकीमती चीजे मिलती है। ठीक उसी तरह राजस्थान के धौलपुर जिले के महाराणा स्कूल के तीन कमरों में सौकड़ों साल बाद दुर्लभ किताबें मिले है। इन तीनों कमरों को कबाड़ समझकर पिछले कई सालों से बंद किए गए थे। लेकिन कमरो को खुलवाने के बाद जो दृश्य सामने आए वो चौकाने वाले थे। स्कूल के हेडमास्टर रमाकांत शर्मा के अनुसार, कमरों में 20 हजार से भी अधिक बेशकीमती दुर्लभ किताबें मिले है। इसमे पांडुलिपियां, ब्रिटिशकालीन पुस्तकें और डिक्शनरी आदि शामिल है।

News

बताया जा रहा है कि इन किताबों में कुछ किताबे वर्ष 1905 से पहले लिखी गई थी। जो आज के समय में दुनिया में कहीं उपल्बध नही है। इतना ही नही कुछ किताबें तो गोल्डेन स्याही से लिखी मिली है, जो काफी कीमती है। इस किताब की कीमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1905 में इन किताबों की कीमत 25-65 रुपये थी। तब गोल्ड की कीमत 27 रूपये तोला था, जबकि अब तकरीबन 40 हजार रुपये है।





किताबों के खजानों से मिली एक किताब की लंबाई तकरीबन 3 फीट है, जिसमें विश्व के अलग- अलग देशों और रियासतों के नक्शे तैयार मिले है। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा वर्ष 1957 में प्रकाशित राष्ट्रीय एटलस, वेस्टर्न-तिब्बत एंड ब्रिटिश बॉडर्र लैंड, सैकंड कंट्री ऑफ हिंदू एंड बुद्धिश 1906, अरबी, फारसी, उर्दू और हिंदी में लिखित पांडुलिपियां समेत कई महत्वपूर्ण ग्रंथ और पांडुलिपियां हैं। अब इन सारी किताबों को सहेजकर रखना जरूरी है, इसलिए एक बड़ी सी लाइब्रेरी तैयार की जाएगी। ताकि भामाशाहों के सहयोग से बने लाइब्रेरी में लोग किताबों पर शोध कर सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here